बूँद ने कहा ‘पापा देखो कितनी सुन्दर पानी की बूँदें’ बिटिया ने उत्साहित होकर पापा से कहा था । रात में हल्की बारिश हुई थी । टीन की छत पर बारिश के कदमों की आहट निरन्तर पड़ कर एक जलीय संगीत उत्पन्न कर रही थीं । बारिश की बूँदों की गति से संगीत की लहरियाँ लहरों की भाँति उठती गिरती थीं । सुबह 4 बजे का समय था । ब्रह्मवेला । बूँदों की आहट से पलकों के पर्दे उठ गए थे । टीन की छत पर जमी मिट्टी के साथ मिलकर बूँदें मिट्टी को सांेधी सोंधी खुशबू बिखेर रही थीं । मौसम खुशगवार हो गया था । पापा उठकर खुले आँगन में आ गए थे और साथ साथ उनकी नन्हीं बिटिया । दोनों वहीं आँगन में कुर्सी डालकर बैठ गए और निहारते रहे कुदरत की खूबसूरतियों को । बूँदों के टपकने की गति समाप्त प्राय हो गई थी । देखते ही देखते सुबह के 5.30 बज गये । ‘आओ बिटिया, थोड़ी देर सैर कर के आते हैं’ पापा ने बिटिया से कहा । बिटिया सहर्ष तैयार हो गई । दोनों घर से निकल पड़े । ‘देखो, देखो पापा अभी भी बारिश की बूँदें घरों से टपक रही हैं । ’ बिटिया काफी उल्लासित...