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Showing posts from 2019

बूँद ने कहा

बूँद ने कहा ‘पापा देखो कितनी सुन्दर पानी की बूँदें’ बिटिया ने उत्साहित होकर पापा से कहा था ।  रात में हल्की बारिश हुई थी ।  टीन की छत पर बारिश के कदमों की आहट निरन्तर पड़ कर एक जलीय संगीत उत्पन्न कर रही थीं ।  बारिश की बूँदों की गति से संगीत की लहरियाँ लहरों की भाँति उठती गिरती थीं ।  सुबह 4 बजे का समय था ।  ब्रह्मवेला ।  बूँदों की आहट से पलकों के पर्दे उठ गए थे ।  टीन की छत पर जमी मिट्टी के साथ मिलकर बूँदें मिट्टी को सांेधी सोंधी खुशबू बिखेर रही थीं ।  मौसम खुशगवार हो गया था ।  पापा उठकर खुले आँगन में आ गए थे और साथ साथ उनकी नन्हीं बिटिया ।  दोनों वहीं आँगन में कुर्सी डालकर बैठ गए और निहारते रहे कुदरत की खूबसूरतियों को ।  बूँदों के टपकने की गति समाप्त प्राय हो गई थी ।  देखते ही देखते सुबह के 5.30 बज गये ।  ‘आओ बिटिया, थोड़ी देर सैर कर के आते हैं’ पापा ने बिटिया से कहा ।  बिटिया सहर्ष तैयार हो गई ।  दोनों घर से निकल पड़े ।  ‘देखो, देखो पापा अभी भी बारिश की बूँदें घरों से टपक रही हैं । ’ बिटिया काफी उल्लासित...

संकल्प

संकल्प ‘भई तू कौन से अस्पताल में जाने की सोच रहा है ?  मैं तो इसी अस्पताल में अपनी जाॅब के लिए अप्लाई करूँगा ?’ डाॅक्टर संजय ने डाॅक्टर समर्थ को कहा ।  दिसम्बर का महीना था ।  आज कुछ नवोदित डाॅक्टरों की इन्टर्नशिप पूरी हो गई थी और सभी के चेहरों पर संतुष्टि और खुशी थी ।  देश की राजधानी दिल्ली के मशहूर सरकारी अस्पताल तथा मैडिकल इन्स्टीट्यूट में अपनी इन्टर्नशिप के दौरान अनेक युवा भविष्य में डाॅक्टर बनने का सपना सँजोये रोगियों की सेवा में लगे रहते थे ।  डाॅक्टरी की अलग अलग विधाओं में पारंगत होने की यह शुरुआत होती है ।  हरेक की अपनी अपनी रुचि रहती है ।  देश के सरकारी अस्पताल जहाँ एक ओर गरीबों और असहायों के लिए वरदान होते हैं वहीं इन अस्पतालों में कार्यरत वरिष्ठ डाॅक्टरों का अनुभव इतना अधिक विस्तृत होता है कि सामथ्र्यवान और समृद्ध परिवारों से भी लोग अपने इलाज के लिए इन्हीं अस्पतालों पर भरोसा करते हैं ।  यह सत्य है कि इन अस्पतालों में समाज के जिस तबके से रोगी आते हैं वे अनेक समस्याओं से ग्रस्त होते हैं ।  विभिन्न रोगों का इलाज करते करते एक विस्तृ...