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Showing posts from October, 2020

अंकुरित रिश्ता

  ‘अम्मा, अम्मा ….. अम्मा, अम्मा’ अंकुरित मूंग बेचने वाला झम्मन बूढ़ी अम्मा के दरवाजे पर खड़ा होकर आवाजें लगा रहा था। ‘क्या बात हो गई, रोज़ मेरा इन्तज़ार करती थीं और आज मेरी आवाज़ सुनकर भी किवाड़ नहीं खोल रही। ‘अम्मा, दरवाजा खोलो, मैं झम्मन हूं, तुम्हारे लिए मूंग लाया हूं, मसालेदार, नरम-नरम, खट्टी-मीठी इमली की चटनी डाल कर, ऊपर से नींबू की दो बूंदें भी डालूंगा हर बार की तरह’ झम्मन उसके छाबे के पास आ खड़े एक-दो ग्राहकों को निपटाते हुए कह रहा था। ‘भाई, प्याज ज़रा और डाल देना, और धनिया भी डाल, उसके बिना स्वाद कैसे आयेगा’ एक ग्राहक कह रहा था। ‘बाबू जी, प्याज तो महंगा है ही, धनिया तो आसमान छू रहा है, मंडी में तीन सौ रुपये किलो है, इसलिए धनिया तो नहीं लाया, क्योंकि न मुझे वारा खायेगा और न ही आप जैसे मेरे ग्राहकों को, एकाध महीना और रुकिए फिर खूब धनिया डाल कर खिलाऊंगा, पिछली कसर भी निकाल दूंगा’ झम्मन ने दोना पकड़ाते हुए कहा। फिर उसे यकायक ध्यान आया ‘अरे अम्मा को क्या हुआ, आज तो किवाड़ ही नहीं खोल रहीं। लगता है मैं गांव चला गया और वापिस आने में सात आठ दिन लग गये तो अम्मा नाराज़ हैं’ कहते-कहते झम्मन ने ...

दरख़्त और परिन्दा

  आम का बड़ा दरख़्त उम्रदराज हो चुका था ।  ऋतु अनुसार फल भी कम लगने लगे थे ।  आसपास के दूसरे आम के दरख़्तों पर मीठे आमों की बहार रहती थी ।  उम्रदराज़ आम के दरख़्त पर एक परिन्दा बचपन से वहीं पला और मीठे आम खाकर बड़ा हुआ था ।  आमों के साथ-साथ उसे उस दरख़्त से भी अपार प्रेम हो गया था ।   ‘मालिक, हमारे आमों के बगीचे में सैंकड़ों आम के दरख़्त हैं ।  मौसम के हिसाब से सभी दरख़्तों पर खूब आम लगते हैं ।  आमदनी भी खूब होती है ।  पर यह दरख़्त अब फल देने योग्य नहीं रहा ।  आम भी बहुत कम लगते हैं और जो लगते भी हैं तो वे परिन्दे चोंच मार कर खा जाते हैं ।  अब इससे उतनी आमदनी भी नहीं हो रही ।  ऐसे में क्या आम के इस दरख़्त को इसी तरह रहने दिया जाये या इसे काट कर इसकी लकड़ी बेच दी जाये और धन कमाया जाये ।  कटे हुए आम के दरख़्त की जगह आम के दरख़्त का नया बीज बो दिया जाये ।’ माली ने मालिक से पूछा ।   ‘हम कल बात करेंगे’ मालिक ने कहा और घर चला गया ।   ‘आपकी बात मैंने सुनी ।  मेरे ख्याल में तो आम के इस दरख़्त को अभी लगा ही रहने द...

खरपतवार

 ‘मम्मी, देखो वह लड़की छोटे-से रिंग में पूरी निकल गई’ लालबत्ती पर रुकी कार में बैठी वृतिका चिल्लाई।   ‘अरे बेटी, यह इनका रोज़ का काम है।’  ‘मम्मी ... वह उल्टा होकर चल रही है!’  ‘हां बेटी, ये बच्चे ऐसे ही करतब करते है।’   हरी बत्ती हो गई। बच्चे दूसरी तरफ लालबत्ती होने पर चले गये।  विराम नहीं, उनकी रोज़ी-रोटी है। ‘कहां से सीखते हैं?’  ‘सड़कों पर मां-बाप को करते देखकर।’  ‘हमें टीचर कई खेल सिखाते हैं पर ये नहीं।’  ‘क्यों ज्यादा सोचती हो, ये ओलिम्पिक खेलने वाले सीखते हैं।’  ‘क्या ये बच्चे बड़े होकर ओलिम्पिक में खेलने जायेंगे?’  ‘नहीं बेटी।’  ‘हमारे टीचर बताते हैं कि वहां जीतने पर मैडल मिलते हैं। ओलिम्पिक में भारत एकाध मैडल जीत पाता है। ये बच्चे बड़े होकर ओलिम्पिक्स में खेलेंगे तो ज़रूर मैडल मिलेगा, इन्हें हराना मुश्किल होगा!’  ‘नहीं बेटी, इनकी किस्मत में ये सब कहां।  ये खरपतवार की भांति है जो उगती है, हरी दिखती है, बस ...!’  ‘खरपतवार! ... साइंस-टीचर ने बताया था ... वो तो ...’ कहती हुई वृतिका गुमसुम हो गई थी। 

सुनो मेरी कहानी

मेरा नाम राज रानी खन्ना है। वर्ष 2020 के अगस्त माह की 15 तारीख होते ही मैं 83 बरस की हो जाऊंगी।  सुदर्शन ने मुझे कम्प्यूटर पर देखकर बताया कि आपकी आयु 83 बरस या 996 माह या 4330 सप्ताह 6 दिन या 30,316 दिन या 727,584 घंटे या 43,655,040 मिनट या 2,610,302,400 सैकेण्ड्स होगी। इतनी गणना सुनकर ताज्जुब हुआ।  मैं इसे अपना सौभाग्य समझती हूं कि मेरा जन्म 15 अगस्त को हुआ।  मेरी मातृभूमि का जन्म भी मेरे लिए तो 15 अगस्त को हुआ।  एक दशाब्दी का फर्क है। जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो मेरी आयु 10 बरस की थी लेकिन उन दिनों हुई घटनाओं ने जीवन के इतने अधिक अनुभव दे दिये कि उस समय लगने लगता कि मैं दस बरस से कहीं अधिक आयु की हूं।  मेरा जन्म 15 अगस्त 1937 को पाकिस्तान के शहर मुलतान के जिस मोहल्ले में हुआ उसका नाम था ‘कोत्रा’।  अपने पिता स्व. श्री चेतनदास मल्होत्रा और माता स्व. प्रकाशवती मल्होत्रा की मैं सबसे बड़ी सन्तान हूं और आज आप सभी के मुखातिब हूं। मेरी कहानी का यह अंश पढ़ने वाले कुछ ऐसे भी होंगे जो उस समय के होंगे और मेरी कहानी पढ़कर खुद को एक बार फिर उस समय से जोड़ पायेंगे।  ब...

Sudershan Navyug: संकल्प

Sudershan Navyug: संकल्प : संकल्प ‘भई तू कौन से अस्पताल में जाने की सोच रहा है ?  मैं तो इसी अस्पताल में अपनी जाॅब के लिए अप्लाई करूँगा ?’ डाॅक्टर संजय ने डाॅक्टर ...